- रैम्प योजना के अंतर्गत सीएफटीआरआई, मैसूर में MSMEs एवं स्टार्टअप्स की तकनीकी एक्सपोज़र विजिट सफलतापूर्वक संपन्न
- Technical Exposure Visit of MSMEs and Startups Successfully Concludes at CFTRI, Mysuru under RAMP Scheme
- Dhvani Bhanushali Receives Warm Appreciation from Gajraj Rao for Papa Hero Tum Mere Track from Her Album ‘Feels’, Singer Reacts
- ईडीआईआई और सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ ने संयुक्त रूप से टेक्नोलॉजी शोकेस एंड एडॉप्शन वर्कशॉप का आयोजन किया
- Varun Dhawan Turns Host for the First Time for IIFA 2027
ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने ʺइंस्टीच्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ (आईओई) का दर्जा दिये जाने पर भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया
नई दिल्ली. ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (आईओई) का दर्जा दिया गया है।
यह जेजीयू के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस संदर्भ में आईओई नियमों के तहत सभी वैधानिक, विनियामक और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को विधिवत रूप से पूरा किया गया है और जेजीयू को ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ के रूप में कार्य करने की स्वीकृति दी गयी है।
आईओई नीति विश्वस्तरीय शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों को विश्व स्तरीय शिक्षण और अनुसंधान संस्थान बनने में मदद करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को लागू करने के लिए शुरू की गई थी। ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ के चयन और सिफारिश की जिम्मेदारी एक सशक्त विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई थी जिसे भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा नियुक्त किया गया था।
ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ के रूप में दर्जा दिये जाने के साथ, जेजीयू देश के शीर्ष 10 निजी संस्थानों के एक प्रतिष्ठित समूह में शामिल हो गया है, जिसे विनियामक नियंत्रणों से हटाकर पूर्ण स्वायत्तता दी गई है।
ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ की तलाश वर्ष 2017 में निजी संस्थानों के लिए ʺयूजीसी (इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटीज) रेगुलेशन, 2017ʺ और सार्वजनिक संस्थानों के लिए यूजीसी (इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस के रूप में सरकारी शिक्षण संस्थानों की घोषणा), दिशानिर्देश 2017ʺ के साथ शुरू हुई।
इस ऐतिहासिक अवसर पर, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक चांसलर और संरक्षक, श्री नवीन जिंदल ने कहा, “मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि जेजीयू को ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ के दर्जा से सम्मानित किया गया है। यह जेजीयू के लिए एक अविश्वसनीय मान्यता है और विश्वविद्यालय की असाधारण उपलब्धियों के लिए एक महान सम्मान है। जेजीयू मेरे पिता श्री ओपी जिंदल की याद में स्थापित किया गया था, जो शिक्षा, उद्यमिता, परोपकार और राष्ट्र-निर्माण में विश्वास करते थे।
हमारी दूरदृष्टि उत्कृष्ट प्रणेताओं का निर्माण करना है जो उन समुदायों में सही मायने में अंतर पैदा करेंगे जिनमें वे रहते हैं। मैं कुलपति, संकाय सदस्यों, छात्रों, हमारे छात्रों के माता-पिता और जेजीयू के कर्मचारियों को उनकी कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता और समर्पण के लिए बधाई देता हूं, जिन्होंने इसकी स्थापना के बाद एक दशक में ही इस शानदार उपलब्धि को हासिल करने में मदद की।
विश्व-स्तरीय विश्वविद्यालय बनने की हमारी यात्रा में, हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और संसाधनों, शैक्षणिक स्वतंत्रता और स्वायत्ता के साथ जेजीयू को सक्षम बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे जो जेजीयू को और अधिक फलने फूलने में मदद करेगा। मुझे विश्वास है कि इससे हमें वैश्विक मंच पर संस्थागत उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। ”
अक्टूबर 2020 में, केंद्रीय कैबिनेट शिक्षा मंत्री, श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की अध्यक्षता में ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’ पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद जेजीयू ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ (आईओई) का दर्जा दिये जाने का उल्लेख करते हुए आधिकारिक पत्र प्राप्त किया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर आज, 29 अक्टूबर 2020 को किए गए।
ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ) सी राज कुमार ने कहा, “जेजीयू के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। जेजीयू को ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ का दर्जा दिए जाने के साथ, हम भारत के शीर्ष 10 सार्वजनिक और शीर्ष 10 निजी संस्थानों के ‘आइवी लीग’ में शामिल हो गए हैं। इसलिए, जेजीयू को अधिकांश नियामक नियंत्रणों से मुक्त रखा गया है और इसे पूर्ण स्वायत्तता दी गई है।
जब 2009 में जेजीयू की स्थापना हुई, तो लक्ष्य बहुत सरल था: भारत में एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय का निर्माण करना। वास्तविकता यह है कि हमें एक दशक से भी कम समय में यह मान्यता मिली है, जो छात्रों, संकाय सदस्यों और जेजीयू के कर्मचारियों के असाधारण योगदान को दर्शाता है।
दुनिया भर के अग्रणी संस्थानों के साथ जेजीयू को बेंचमार्क करते हुए उत्कृष्टता प्राप्त करना हमारा सपना रहना है। हमारे संस्थापक चांसलर, श्री नवीन जिंदल ने जेजीयू की स्थापना करके और थोड़े समय में उत्कृष्टता की महान ऊंचाइयों को प्राप्त करके भारतीय परोपकार के लिए एक वैश्विक मानदंड स्थापित किया था और हम उच्च शिक्षा में परोपकार को बढ़ावा देने में उनके परिवर्तनकारी नेतृत्व के प्रति आभारी हैं।“
प्रोफेसर सी राज कुमार ने विश्वविद्यालयों की वैश्विक रैंकिंग में जेजीयू की शानदार उपस्थिति को दर्शाते हुए कहा, “जेजीयू- एशिया रैंकिंग, ब्रिक्स रैंकिंग और विश्व रैंकिंग तीनों स्तरों पर क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में अव्वल रहा, जिससे उसे नवीनतम क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुसार भारत के नंबर 1 निजी विश्वविद्यालय के रूप में और नवीनतम क्यूएस वर्ल्ड ‘यंग’ यूनिवर्सिटी रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष 150 विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता मिली।
हालांकि, हम क्या करते हैं, हमारा दृष्टिकोण क्या है, हमने क्या प्राप्त किया है, और आने वाले वर्षों में हम जो हासिल करने का इरादा रखते हैं यह हमारे अपने देश से मान्यता मिलने के संदर्भ में हमारे लिए बहुत उत्साहजनक है। यह मान्यता हमारे लिए प्रेरणा का काम करेगी और जेजीयू को सीखने और ज्ञान सृजन में सफलता के नए शिखर तक पहुँचाती रहेगी और भारत के ग्लोबल यूनिवर्सिटी के रूप में उत्कृष्टता के लिए बेंचमार्क बनने में मदद करती रहेगी। ”
ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ की तलाश वर्ष 2017 में निजी संस्थानों के लिए ʺयूजीसी (इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटीज) रेगुलेशन, 2017ʺ और सार्वजनिक संस्थानों के लिए यूजीसी (इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस के रूप में सरकारी शिक्षण संस्थानों की घोषणा), दिशानिर्देश 2017ʺ के साथ शुरू हुई।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को 10 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और 10 निजी विश्वविद्यालयों का चयन करने का काम सौंपा गया था जो भारतीय उच्च शिक्षा के वैश्विक पदचिह्न को बढ़ाने के दृष्टिकोण का नेतृत्व करेंगे। इन ʺइंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंसʺ के लिए अंतिम उद्देश्य कुछ वर्षों में विश्व स्तर की स्थिति हासिल करना था।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की महत्वाकांक्षी 20 विश्व स्तरीय संस्थानों की परियोजना के लिए दिसंबर 2017 तक देश भर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से 100 से अधिक आवेदन प्राप्त किए।
नियुक्त विशेषज्ञ समिति ने कुल 114 आवेदनों पर विचार किया जिनमें सार्वजनिक संस्थानों से 74 और निजी संस्थानों से 40 आवेदन शामिल थे, जिसमें अभी तक स्थापित किए जाने वाले संस्थान (ग्रीनफील्ड श्रेणी) भी शामिल हैं और आठ सार्वजनिक संस्थानों और तीन निजी संस्थानों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इसके अलावा, उन्नीस और संस्थानों का बाद में सुझाव दिया गया था।
जेजीयू के रजिस्ट्रार, प्रोफेसर दाबिरु श्रीधर पटनायक ने कहा, “जेजीयू हमेशा भारत में एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनाने और वैश्विक प्रणेताओं को बनाने में मदद करने को इच्छुक रहा है। ʺइंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ के रूप में मान्यता मिलना भारतीय उच्च शिक्षा के वैश्विक पदचिह्न को बढ़ाने के हमारे दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
यह विशेष प्रयास तीन साल की परियोजना है, जिसका समापन अंततः भारत सरकार द्वारा जेजीयू को दिए जाने वाले आईओई के सर्वोच्च दर्जा से हुआ। यह शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की हमारी खोज को मिली एक मान्यता है जहां हमारी दशक लंबी यात्रा आज 10 अंतर-अनुशासनात्मक स्कूलों में समाप्त हो गई है, जिसमें 6500 से अधिक छात्र और 730 से अधिक पूर्णकालिक संकाय सदस्य हैं। ”
जिन संस्थानों को नेशनल इंस्टीच्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क रैंकिंग में शीर्ष 50 में जगह मिली या जो कुछ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रेटिंग में शीर्ष 500 में शामिल हैं, वे आवेदन करने के लिए पात्र थे। आखिरकार, केवल 10 सार्वजनिक और 10 निजी संस्थानों का चयन किया गया। सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को सरकार से वित्तीय सहायता मिलेगी और निजी संस्थानों को ʺइंस्टीच्यूशन ऑफ एमिनेंसʺ के रूप में दर्जा दिया जाएगा, लेकिन कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी, लेकिन वे एक विशेष श्रेणी के डीम्ड विश्वविद्यालय के रूप में अधिक स्वायत्तता के हकदार होंगे।


